विषय-सूची
प्रथम भाग
१. वेदमाता गायत्री की उत्पत्ति
२. गायत्री-सूक्ष्म शक्तियों का स्रोत है
३. गायत्री साधना से शक्ति-काेशों का उद्भव
४. गायत्री ही कामधेनु है
५. गायत्री और ब्रह्म की एकता
६. गायत्री द्वारा सतोगुण वृद्धि के दिव्य लाभ
७. महापुरुषों द्वारा गायत्री महिमा का गान
८. गायत्री-साधना से सतोगुणी सिद्धियाँ
९. गायत्री साधना से श्री, समृद्धि और सफलता
१०. गायत्री साधना से आपत्तियों का निवारण
११. देवियों की गायत्री साधना
१२. जीवन का काया-कल्प
१३. स्त्रियों को गायत्री का अधिकार
१४. क्या स्त्रियों को वेद का अधिकार नहीं?
१५. नारी पर प्रतिबन्ध और लांछन क्यों?
१६. मालवीय जी द्वारा निर्णय
१७. स्त्रियाँ अनधिकारिणी नहीं हैं
१८. गायत्री का शाप, विमोचन और उत्कीलन का रहस्य
१९, गायत्री की मूर्तिमान् प्रतिमा—यज्ञोपवीत
२०. गायत्री साधना का उद्देश्य
२१. निष्काम साधना का तत्त्वज्ञान
२२. इन साधनाओं में अनिष्ट का कोई भय नहीं
२३. साधकों के लिए कुछ आवश्यक नियम
२४. साधना, एकाग्रता औरर स्थिर चित्त से होनी चाहिए
२५. गायत्री द्वारा सन्ध्या-वन्दन
२६. गायत्री का सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वसुलभ ध्यान
२७. पापनाशक और शक्तिवर्धक तपश्चर्याएँ
२८. गायत्री साधना से पाप-मुक्ति
२९. आत्म-शक्ति का अकूत भण्डार
३०. सदैव शुभ गायत्री यज्ञ
३१. नव दुर्गाओं में गायत्री साधना
३२. महिलाओं के लिए विशेष साधनाएँ
३३. एक वर्ष की उद्यापन साधना
३४. गायत्री साधना से अनेकों प्रयोजनों की सिद्धि
३५. गायत्री का अर्थ चिन्तन
३६. माता से वार्त्तालाप करने की साधना
३७. साधकों के स्वप्न निरर्थक नहीं होते
३८. सफलता के लक्षण
३९. सिद्धियों का दुरुपयोग न होना चाहिए
४०. गायत्री द्वारा वाममार्गी तांत्रिक साधनाएँ
४१. गायत्री द्वारा कुण्डलिनी जागरण
४२. षटचक्रों का वेधन
४३. यह टिव्य प्रसाद औरों को भी बाँटिये
४४. गायत्री से यज्ञ का सम्बन्ध
द्वितीय भाग
१. गायत्री माहात्म्य
२. गायत्री गीता
३. गायत्री स्मृति
४. गायत्री उपनिषद्
५. गायत्री रामायण
६. गायत्री हृदयम्
७. गायत्री पंजरम्
८. गायत्री संहिता
९. गायत्री तन्त्र
१०. गायत्री अभिचार
११, मारण प्रयोग
१२. चौबीस गायत्री
१३. गायत्री पुरश्चरण
१४. नित्य-कर्म
१५. सन्ध्या
१६. गायत्री पूजन
१७. गायत्री ध्यान
१८. गायत्री कवच
१९. न्यास
२०. गायत्री स्तोत्र
२१. गायत्री शाप मोचन
२२. गायत्री हवन
२३. गायत्री तर्पण
२४. मार्जन
२५, गायत्री की २४ मुद्रायें
२६. विसर्जन
२७. अर्घ्यदान
२८. क्षमा प्रार्थना
२९. ब्राह्मण भोजन
३०. गायत्री लहरी
३१. गायत्री चालीसा
३२. आरती गान
३३. गायत्री सहस्रनाम का विज्ञान
३४. गायत्री सहस्रनाम
३५. गायत्री के ऋषि, छन्द और देवता
३६. गायत्री अभियान की साधना
३७. गायत्री वन्दना
तृतीय भाग
गायत्री के पाँच मुखः
[देवताओं के अधिक अंगों का रहस्य, पाँच मुखों में पाँच गुप्त कोशों का संकेत। ]
अनन्त आनन्द की साधना:
[वरुण और भृगु का संवाद, पाँच कोशों के ज्ञान से ब्रह्म विभूति की प्राप्ति। ]
गायत्री मंजरी:
[योग साधना की ४६ श्लोकों वाली पुस्तक, जिसकी व्याख्या के रूप में गायत्री महाविज्ञान तृतीय भाग| ]
अन्नमय कोश और उसकी साधनाः
[उपवास, आसन, सूर्य नमस्कार की विधि, पंच-तत्त्वों की विशेष साधना, तपश्चर्या। ]
प्राणमय कोश की साधनाः
[प्राणायाम, प्राणाकर्षण की सुगम क्रियायें, तीन बन्ध, सात मुद्रायें, नौ प्राणायाम। ]
मनोमय कोश की साधना:
[ध्यान, त्राटक, जप साधना, तन्मात्रा साधना ]
विज्ञानमय कोश की साधना:
[ सोऽहं साधना, आत्मानुभूतियोग, आत्म-चिन्तन की साधना, स्वर योग। ]
आनन्दमय कोश की साधना:
[ नाद साधना, बिन्दु साधना, कला साधना (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश), तुरीयावस्था का
परमानन्द| ]
पञ्चकोशी साधना का ज्ञातव्यः
[ साधना का अन्धानुकरण हानिकारक है, साधना की उपयोगिता और आवश्यकता पर प्रकाश। ]
पञ्चमुखी साधना का उद्देश्यः
[ आत्म-कल्याण के पाँच महान् लाभ, दस भुजाओं से दस दोषों का निवारण। ]
गायत्री साधना निष्फल नहीं जाती:
[ गायत्री साधना का प्रभाव तत्काल, बाधाओं का निवारण, उन्नति के अनेक मार्गों का खुलना। ]
गायत्री का तन्त्रोक्त वाम मार्ग:
[ खतरों से भरा मार्ग, तन्त्र विज्ञान गोपनीय। ]
गायत्री की गुरुदीक्षाः
[ मनोभूमि का परिष्कार, गायत्री द्वारा द्विजत्व, मन्त्र दीक्षा, अग्नि दीक्षा, ब्रह्मदीक्षा, परावाणी द्वारा अन्तरंग प्रेरणा, गुरु की महान् जिम्मेदारी। ]