अध्यात्म का सच्चा स्वरूप (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
एक दफे शिव और पार्वती गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो शंकर जी ने कहा—पार्वती! आज क्या है? आज सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या को सब गंगा नहाने जा रहे हैं। हाँ, सब गंगा नहाने जा रहे हैं? अजी साहब! क्या मजाक कर रहे हैं? सब गंगा नहाने जाएँगे, तो कैसे काम चलेगा? ये सब स्वर्ग जाएँगे? उन्होंने कहा—हाँ। पार्वती! कहते तो ऐसा ही हैं कि ये सब स्वर्ग जाएँगे
मुझसे चला नहीं जा रहा है। आज सोमवती अमावस्या है और मैं अपने पति को नहलाने के लिए लाई हूँ। " उसने कहा—"माँ! थोड़ी सी सेवा करने का समय हमें दो। हम आपके पति को नहलाकर लाएँगे
असली भक्त कौन? एक दफे शिव और पार्वती गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो शंकर जी ने कहा—पार्वती! आज क्या है? आज सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या को सब गंगा नहाने जा रहे हैं। हाँ, सब गंगा नहाने जा रहे हैं? अजी साहब! क्या मजाक कर रहे हैं? सब गंगा नहाने जाएँगे, तो कैसे काम चलेगा? ये सब स्वर्ग जाएँगे? उन्होंने कहा—हाँ। पार्वती! कहते तो ऐसा ही हैं कि ये सब स्वर्ग जाएँगे
एक दफे शिव और पार्वती गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो शंकर जी ने कहा—पार्वती! आज क्या है? आज सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या को सब गंगा नहाने जा रहे हैं। हाँ, सब गंगा नहाने जा रहे हैं? अजी साहब! क्या मजाक कर रहे हैं? सब गंगा नहाने जाएँगे, तो कैसे काम चलेगा? ये सब स्वर्ग जाएँगे? उन्होंने कहा—हाँ
बेटे! हमारी भक्ति कब परिपूर्ण होती है? हमें अपने आराध्य के प्रति, अपने इष्ट के प्रति उतना ही विश्वास, उतनी ही श्रद्धा, उतना ही समर्पण चाहिए, जितना कि रैदास के जीवन में था। असली भक्त कौन? एक दफे शिव और पार्वती गंगा स्नान के लिए जा रहे थे तो शंकर जी ने कहा—पार्वती! आज क्या है? आज सोमवती अमावस्या है। सोमवती अमावस्या को सब गंगा नहाने जा रहे हैं। हाँ, सब गंगा नहाने जा रहे हैं? अजी साहब! क्या मजाक कर रहे हैं? सब गंगा नहाने जाएँगे, तो कैसे काम चलेगा? ये सब स्वर्ग जाएँगे? उन्होंने कहा—हाँ

विज्ञानमयकोश की साधना—करुणा का जागरण (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा—महाराज जी! यह क्या बात है, इतनी भीड़ क्यों जमा है? शंकर जी ने कहा—आज सोमवती अमावस्या है। इस सोमवती अमावस्या के स्नान से क्या फायदा है? शंकर जी बोले—जो कोई आदमी आज के दिन गंगा नहाता है, सो वैकुण्ठ को चला जाता है। पार्वती जी चुप हो गईं और कुछ विचार करने लगीं। उन्होंने कहा—क्या बात है? वैकुण्ठ तो महाराज जी वही है—जिसमें हम और आप रहते हैं
पार्वती जी ने कहा—यह बात गलत है कि सोमवती अमावस्या पर स्नान करने वाला हर व्यक्ति वैकुण्ठ को जाता है। हर व्यक्ति वैकुण्ठ को नहीं जा सकता? नहीं पार्वती! जाता है, यह शास्त्रों में लिखा है। नहीं महाराज जी! नहीं जाता होगा, शास्त्रों में गलत बताया गया होगा? नहीं ठीक लिखा है
उन्होंने कहा—हाँ, तो वहाँ तो-दो हजार लोगों के रहने की जगह नहीं है और ये तो पचास लाख लोग स्नान कर रहे हैं। अगर ये पचास लाख आदमी स्वर्ग में जाएँगे, तो वहाँ रहेंगे कहाँ? हर साल में कितनी सोमवती अमावस्या होती हैं? चार-पाँच तो होती ही हैं, तो महाराज जी! ये तो दो करोड़ आदमी हो गए। दो हजार आदमियों की जगह नहीं है और हर साल दो करोड़ लोग जाएँगे, तो बीस साल में, तीस साल में, पचास साल में तो वहाँ करोड़ों, अरबों, खरबों आदमी हो जाएँगे। फिर ये रहेंगे कहाँ? निर्मल अन्तःकरण से होगा गंगास्नान पार्वती जी ने कहा—यह बात गलत है कि सोमवती अमावस्या पर स्नान करने वाला हर व्यक्ति वैकुण्ठ को जाता है
एक बार सोमवती अमावस्या के दिन हजारों-लाखों आदमी गंगास्नान कर रहे थे। पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा—महाराज जी! यह क्या बात है, इतनी भीड़ क्यों जमा है? शंकर जी ने कहा—आज सोमवती अमावस्या है। इस सोमवती अमावस्या के स्नान से क्या फायदा है? शंकर जी बोले—जो कोई आदमी आज के दिन गंगा नहाता है, सो वैकुण्ठ को चला जाता है। पार्वती जी चुप हो गईं और कुछ विचार करने लगीं
दो हजार आदमियों की जगह नहीं है और हर साल दो करोड़ लोग जाएँगे, तो बीस साल में, तीस साल में, पचास साल में तो वहाँ करोड़ों, अरबों, खरबों आदमी हो जाएँगे। फिर ये रहेंगे कहाँ? निर्मल अन्तःकरण से होगा गंगास्नान पार्वती जी ने कहा—यह बात गलत है कि सोमवती अमावस्या पर स्नान करने वाला हर व्यक्ति वैकुण्ठ को जाता है। हर व्यक्ति वैकुण्ठ को नहीं जा सकता? नहीं पार्वती! जाता है, यह शास्त्रों में लिखा है। नहीं महाराज जी! नहीं जाता होगा, शास्त्रों में गलत बताया गया होगा? नहीं ठीक लिखा है
अच्छा महाराज जी! हमारे शंकर जी की बात बताइए? तो बेटे, शंकर जी की बात सुन। एक बार सोमवती अमावस्या के दिन हजारों-लाखों आदमी गंगास्नान कर रहे थे। पार्वती जी ने शंकर जी से पूछा—महाराज जी! यह क्या बात है, इतनी भीड़ क्यों जमा है? शंकर जी ने कहा—आज सोमवती अमावस्या है। इस सोमवती अमावस्या के स्नान से क्या फायदा है? शंकर जी बोले—जो कोई आदमी आज के दिन गंगा नहाता है, सो वैकुण्ठ को चला जाता है
उन्होंने कहा—हाँ, तो वहाँ तो-दो हजार लोगों के रहने की जगह नहीं है और ये तो पचास लाख लोग स्नान कर रहे हैं। अगर ये पचास लाख आदमी स्वर्ग में जाएँगे, तो वहाँ रहेंगे कहाँ? हर साल में कितनी सोमवती अमावस्या होती हैं? चार-पाँच तो होती ही हैं, तो महाराज जी! ये तो दो करोड़ आदमी हो गए। दो हजार आदमियों की जगह नहीं है और हर साल दो करोड़ लोग जाएँगे, तो बीस साल में, तीस साल में, पचास साल में तो वहाँ करोड़ों, अरबों, खरबों आदमी हो जाएँगे। फिर ये रहेंगे कहाँ?

सौभाग्यशाली वसन्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
शंकर और पार्वती जा रहे थे। सोमवती अमावस्या थी। गंगास्नान करने को लोगों की भीड़ जा रही थी। उन्होंने कहा कि शंकर जी! ये सारी इतनी जो भीड़ है, ये कहाँ जा रही है

धर्मतंत्र का परिष्कार अत्यन्त अनिवार्य (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा से ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं। उनका खरचा लगा दिया जाए, तो पचास करोड़ रुपया खरच करने वालों से प्रार्थना की गई होती कि आप एक वर्ष स्नान करने की अपेक्षा गंगा का उपयोग, गंगा की महत्ता समाज में बनाए रखने के लिए विवेकपूर्वक विचार करें
एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा से ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं। उनका खरचा लगा दिया जाए, तो पचास करोड़ रुपया खरच करने वालों से प्रार्थना की गई होती कि आप एक वर्ष स्नान करने की अपेक्षा गंगा का उपयोग, गंगा की महत्ता समाज में बनाए रखने के लिए विवेकपूर्वक विचार करें। मित्रो! जिन शहरों की गन्दी नालियाँ गंगा में डाली जाती हैं, वहाँ का पानी अपवित्र कर दिया जाता है
जिसका परिणाम रचनात्मक न हो सका तथा व्यक्ति और समाज की कोई खास सेवा न हो सकी। अत्यधिक अपव्यय धर्म के नाम पर हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है
कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा से ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं। उनका खरचा लगा दिया जाए, तो पचास करोड़ रुपया खरच करने वालों से प्रार्थना की गई होती कि आप एक वर्ष स्नान करने की अपेक्षा गंगा का उपयोग, गंगा की महत्ता समाज में बनाए रखने के लिए विवेकपूर्वक विचार करें
अत्यधिक अपव्यय धर्म के नाम पर हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा से ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं
हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है
हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने-पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा से ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं

गायत्री परिवार का उद्देश्य — पीड़ा और पतन का निवारण (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इस तरह लोगों के इकट्ठा करने की संख्या के आधार पर हम सफलता असफलता का अन्दाज नहीं करते। मित्रो! लोगों की संख्या के आधार पर यदि हमने सफलता-असफलता के मूल्यांकन किये होते, तो सोमवती अमावस्या के दिन गंगा जी के एक-एक घाट पर लाखों आदमी स्नान करते हैं। अगर हम यह मान लें कि हिन्दुस्तान में गंगा जी के घाट करीब सौ हैं और एक-एक घाट पर एक-एक लाख आदमी स्नान करते हैं। तब यह माना जा सकता है कि एक करोड़ आदमी धर्मात्मा हैं
मित्रो! लोगों की संख्या के आधार पर यदि हमने सफलता-असफलता के मूल्यांकन किये होते, तो सोमवती अमावस्या के दिन गंगा जी के एक-एक घाट पर लाखों आदमी स्नान करते हैं। अगर हम यह मान लें कि हिन्दुस्तान में गंगा जी के घाट करीब सौ हैं और एक-एक घाट पर एक-एक लाख आदमी स्नान करते हैं। तब यह माना जा सकता है कि एक करोड़ आदमी धर्मात्मा हैं

सृजनसैनिकों को दिशा-निर्देश (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
कहाँ हैं सच्चे आदमी? मित्रो! हमें उनकी बहुत तलाश है, पर वे हमको नहीं मिलते। सोमवती अमावस्या पर जाते हैं, वहाँ एक भी आदमी हमें नहीं मिलता। मंसादेवी के मन्दिर पर जाते हैं, वहाँ भी एक आदमी नहीं मिलता। कुम्भ के मेले में जाते हैं, तो वहाँ एक भी आदमी नहीं मिलता
मित्रो! हमें उनकी बहुत तलाश है, पर वे हमको नहीं मिलते। सोमवती अमावस्या पर जाते हैं, वहाँ एक भी आदमी हमें नहीं मिलता। मंसादेवी के मन्दिर पर जाते हैं, वहाँ भी एक आदमी नहीं मिलता। कुम्भ के मेले में जाते हैं, तो वहाँ एक भी आदमी नहीं मिलता
पागलों को तो चाहे जहाँ ले जाइये। सोमवती अमावस्या मेले में ले जाइये। वे रामलीला में, रामचन्द्र जी की बारात जो निकलती है, वहाँ भी इकट्ठे हो जायेंगे। कागज का पुतला बना लीजिए

सही अध्यात्म जीवन में आ जाए तो गजब ढा दे (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
रामलीला के नाम पर बीस-बीस लाख आदमियों की भीड़ भागते मैंने देखी है। सोमवती अमावस्या के दिन पाँच-पाँच और दस-दस लाख आदमी एक-एक घाट पर स्नान करते देखे हैं। आध्यात्मिकता का यह प्रभाव मित्रो!, अगर सृजनात्मक दिशा में लग गया होता, तो हमारा देश भारत देश, अध्यात्मवादी देश सारे विश्व का कायाकल्प करने में समर्थ हो गया होता। अपना ही नहीं, वरन् सारे विश्व का इसने कायाकल्प कर दिया होता

धर्मतंत्र का परिष्कार अत्यन्त अनिवार्य (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से-कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा-से-ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं
कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से-कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा-से-ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं। उनका खरच लगा दिया जाए तो पचास करोड़ रुपया हो जाता है
जिसका परिणाम रचनात्मक न हो सका तथा व्यक्ति और समाज की कोई खास सेवा न हो सकी। अत्यधिक अपव्यय धर्म के नाम पर हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से-कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है
अत्यधिक अपव्यय धर्म के नाम पर हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से-कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा-से-ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं
एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है। आप कल्पना कीजिए कि कम-से-कम चार और ज्यादा-से-ज्यादा पाँच सोमवती अमावस्या हर वर्ष होती हैं। उनका खरच लगा दिया जाए तो पचास करोड़ रुपया हो जाता है। अगर हर साल इस पचास करोड़ रुपया खरच करने वालों से प्रार्थना की गई होती कि आप एक वर्ष स्नान करने की अपेक्षा गंगा का उपयोग, गंगा की महत्ता समाज में बनाए रखने के लिए विवेकपूर्वक विचार करें
हिन्दुस्तान में सोमवती अमावस्या के दिन गंगास्नान का बहुत महत्त्व है। कल्पना कीजिए कि हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक स्नान करने वालों की संख्या कम-से-कम हर सोमवती अमावस्या के दिन पचास लाख हो जाती है। एक आदमी के जाने-आने का, श्रम का, खाने पीने का, दान-दक्षिणा आदि का खरच बीस रुपया आता हो और उसे पचास लाख से गुणा कर दिया जाए तो दस करोड़ रुपया प्रति सोमवती अमावस्या का खरच आता है

कैसी होती है सच्ची भक्ति? (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
एक बार लोग गंगास्नान करने के लिए जा रहे थे। उस दिन सोमवती अमावस्या का स्नान था
दूसरा मैं सुनाना चाहूँगी रैदास का। सोमवती अमावस्या थी और लोग गंगास्नान करने जा रहे थे। रैदास से कहा कि चलो आप भी गंगास्नान के लिए चलो
एक बार लोग गंगास्नान करने के लिए जा रहे थे। उस दिन सोमवती अमावस्या का स्नान था। शंकर जी और पार्वती जी उधर से गुजरे। पार्वती बोलीं कि महाराज! यह बताइए कि ये जो भीड़ है, ये किसलिए जा रही है
दूसरा मैं सुनाना चाहूँगी रैदास का। सोमवती अमावस्या थी और लोग गंगास्नान करने जा रहे थे। रैदास से कहा कि चलो आप भी गंगास्नान के लिए चलो। उन्होंने कहा—"लो मेरे फूल और माँ गंगा को अर्पण कर देना तथा कहना कि रैदास आज व्यस्त है, वो आ नहीं पाया

युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि उनका विवेकसम्मत और योजनाबद्ध उपयोग होने लगे तो उनसे सरकारी विकास योजनाओं की अपेक्षा सौ गुना अधिक कार्य स्वेच्छापूर्वक हो सकता है। हर सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने प्रायः ५० लाख व्यक्ति आते हैं। हर व्यक्ति के समय तथा खर्च करने का औसत लगाया जाये तो १० करोड़ होता है। यदि वह पैसा गंगा में पड़ने वाले गन्दे नाले कृषि कार्य के लिए मोड़ देने में लगाया जा सके तो एक साल में ही गंगा माता की स्वच्छता और सिंचाई में करोड़ों की आमदनी बढ़ सकती है

युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि उनका विवेकसम्मत और योजनाबद्ध उपयोग होने लगे तो उनसे सरकारी विकास योजनाओं की अपेक्षा सौ गुना अधिक कार्य स्वेच्छापूर्वक हो सकता है। हर सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने प्रायः ५० लाख व्यक्ति आते हैं। हर व्यक्ति के समय तथा खर्च करने का औसत लगाया जाये तो १० करोड़ होता है। यदि वह पैसा गंगा में पड़ने वाले गन्दे नाले कृषि कार्य के लिए मोड़ देने में लगाया जा सके तो एक साल में ही गंगा माता की स्वच्छता और सिंचाई में करोड़ों की आमदनी बढ़ सकती है

युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि उनका विवेकसम्मत और योजनाबद्ध उपयोग होने लगे तो उनसे सरकारी विकास योजनाओं की अपेक्षा सौ गुना अधिक कार्य स्वेच्छापूर्वक हो सकता है। हर सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने प्रायः ५० लाख व्यक्ति आते हैं। हर व्यक्ति के समय तथा खर्च करने का औसत लगाया जाये तो १० करोड़ होता है। यदि वह पैसा गंगा में पड़ने वाले गन्दे नाले कृषि कार्य के लिए मोड़ देने में लगाया जा सके तो एक साल में ही गंगा माता की स्वच्छता और सिंचाई में करोड़ों की आमदनी बढ़ सकती है

समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान-2 (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
कीर्तन, स्नान के लिए हिन्दू कम से कम एक लाख की संख्या में समुद्र में स्नान और पूजन के लिए उसी तरह पहुँचते हैं जैसे भारत में सोमवती अमावस्या को गंगा आदि नदियों पर धार्मिक लोगों की भीड़ होती है। शिवरात्रि पर दक्षिण मौरीशस के तालाब में नहाने के लिए भी हिन्दू जनता इसी उत्साह के साथ पहुँचती है। साधारणतया पैंट पहिनने वाले भी उस दिन धोती पहिनते हैं
मन्दिर, मसजिद और गिरजाघर भीड़ से भरे रहते हैं। कीर्तन, स्नान के लिए हिन्दू कम से कम एक लाख की संख्या में समुद्र में स्नान और पूजन के लिए उसी तरह पहुँचते हैं जैसे भारत में सोमवती अमावस्या को गंगा आदि नदियों पर धार्मिक लोगों की भीड़ होती है। शिवरात्रि पर दक्षिण मौरीशस के तालाब में नहाने के लिए भी हिन्दू जनता इसी उत्साह के साथ पहुँचती है। साधारणतया पैंट पहिनने वाले भी उस दिन धोती पहिनते हैं

युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि उनका विवेकसम्मत और योजनाबद्ध उपयोग होने लगे तो उनसे सरकारी विकास योजनाओं की अपेक्षा सौ गुना अधिक कार्य स्वेच्छापूर्वक हो सकता है। हर सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने प्रायः ५० लाख व्यक्ति आते हैं। हर व्यक्ति के समय तथा खर्च करने का औसत लगाया जाये तो १० करोड़ होता है। यदि वह पैसा गंगा में पड़ने वाले गन्दे नाले कृषि कार्य के लिए मोड़ देने में लगाया जा सके तो एक साल में ही गंगा माता की स्वच्छता और सिंचाई में करोड़ों की आमदनी बढ़ सकती है

युगऋषि की वेदना एवं उमंगें जानें — तदनुसार कुछ करें (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
भीड़ में क्या बना है। सोमवती अमावस्या को गंगा तट पर स्नान करने वाले और रामलीला में रावण-वध के उत्सव में उपस्थित रहने वाले तथाकथित धार्मिक लोगों की भारी भीड़ जमा होती है, पर उस जनसमूह के पीछे कोई लक्ष्य नहीं होता। अतएव उस एकत्रीकरण का न व्यक्ति को लाभ मिलता है और न समाज को। वह जमघट विडंबना मात्र बनकर रह जाता है

युग निर्माण योजना के आदर्श और सिद्धान्त (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
यदि उनका विवेकसम्मत और योजनाबद्ध उपयोग होने लगे तो उनसे सरकारी विकास योजनाओं की अपेक्षा सौ गुना अधिक कार्य स्वेच्छापूर्वक हो सकता है। हर सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान करने प्रायः ५० लाख व्यक्ति आते हैं। हर व्यक्ति के समय तथा खर्च करने का औसत लगाया जाये तो १० करोड़ होता है। यदि वह पैसा गंगा में पड़ने वाले गन्दे नाले कृषि कार्य के लिए मोड़ देने में लगाया जा सके तो एक साल में ही गंगा माता की स्वच्छता और सिंचाई में करोड़ों की आमदनी बढ़ सकती है

समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान-5 (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
छतों पर भारतीय ध्वजा-पताका फहराना, उन्हें बहुत प्रिय है। कार्तिकी पूर्णिमा को समुद्र स्नान के लिए वे लोग ऐसे ही जाते हैं, जैसे सोमवती अमावस्या को भारत में दिखाई पड़ता है। यहाँ के भारतीयों में अपनी संस्कृति के प्रति अगाध निष्ठा है। ये लोग भारत को अपनी धर्मभूमि और मातृभूमि मानते हैं

परमार्थपरायण बनें—दैवी अनुग्रह पाएँ (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
वसन्त पंचमी के दिन हर आदमी का सौभाग्य आता है। हमने यह भी सुना है कि सोमवती अमावस्या के दिन गंगा जी में दूध की एक धारा आती है तथा जो भी उसमें स्नान करते हैं उनका जीवन धन्य हो जाता है। लोग स्वर्ग चले जाते हैं। यह बात कहाँ तक सही या गलत है, यह मैं नहीं कह सकता हूँ

बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 41-50 (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
पचास लाख व्यक्तियों के पीछे दस रुपया प्रति के हिसाब से ५ करोड़ हुआ। वर्ष में ४-५ सोमवती अमावस्या होती हैं। यहाँ राशि प्रायः २५ करोड़ जा पहुँचती है। गंगा की ही तरह अन्य प्रान्तों में अनेक पवित्र नदियाँ हैं
नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सरयू, यमुना आदि प्रमुख दस नदियों का महत्त्व और माहात्म्य प्रायः गंगा के समतुल्य ही समझा जाता है। सोमवती अमावस्या पर वहाँ भी उसी श्रद्धा से उन क्षेत्रों के लोग स्नान करने जाते हैं। इन सब पर पहुँचने वाली जनता का व्यय ७५ करोड़ माना जा सकता है। इस प्रकार सोमवती सन्दर्भ में लगने वाली राशि १०० करोड़ के लगभग जा पहुँचती है
उदाहरण के लिए सोमवती पर्व पर गंगा स्नान जैसी छोटी बात का ही पर्यवेक्षण करके देखा जाय। उत्तरकाशी से लेकर गंगा सागर तक प्रत्येक सोमवती अमावस्या को प्रायः पचास लाख व्यक्ति स्नान करते हैं। इनमें से कुछ स्थानीय एवं समीपवर्ती होते हैं कुछ दूरवर्ती। सभी का समय लगता है

बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 141-150 (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इस प्रकार वह राशि ३६० अरब वार्षिक हो जाती है। सोमवती अमावस्या पर गंगा जमुना इन दो नदियों के स्नान को ही लें उनके उद्गम से लेकर विलय स्थान तक कम से कम एक करोड़ व्यक्ति तो अवश्य ही उस पर्व पर स्नान करने जाते होंगे। एक व्यक्ति के ऊपर मार्ग व्यय, काम का हर्ज, भोजन, दान पुण्य आदि का खर्च बीस रुपया भी जोड़ा जाय तो एक करोड़ व्यक्तियों पर बीस रुपये के हिसाब से २० करोड़ रुपया होता है। ऐसी ऐसी चार पाँच सोमवती अमावस्याएँ वर्ष में पड़ती है उनका खर्च १ अरब तक जा पहुँचता है
एक व्यक्ति के ऊपर मार्ग व्यय, काम का हर्ज, भोजन, दान पुण्य आदि का खर्च बीस रुपया भी जोड़ा जाय तो एक करोड़ व्यक्तियों पर बीस रुपये के हिसाब से २० करोड़ रुपया होता है। ऐसी ऐसी चार पाँच सोमवती अमावस्याएँ वर्ष में पड़ती है उनका खर्च १ अरब तक जा पहुँचता है। इसके अतिरिक्त कथा, कीर्तन, यज्ञ, समारोह, भोज भण्डारों आदि का हिसाब तैयार किया जाय तो वह राशि न जाने कहाँ से कहाँ पहुँचेगी। इस प्रकार देखने पर उपेक्षित जैसा लगने वाला धर्मक्षेत्र ही इतनी धन सम्पत्ति खर्च करा लेता है, श्रम और समय लगा लेता है जितना कि तरह तरह के दबाव डालने वाली सुसंगठित सरकार भी लगा नहीं पाती

बिना पानी पिए लिखे हुए फोल्डर-पत्रक 161-170 (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
भारत को ही लें। यहाँ देवालयों का, तीर्थयात्रा का, कर्मकाण्डों का सोमवती अमावस्या से लेकर कुंभ जैसे छोटे-बड़े पर्वों का खर्चा जोड़ा जाय तो वह सरकार द्वारा वसूल किये जाने वाले राजस्व से कहीं अधिक बैठता है। जिनका धर्म ही आजीविका व्यवसाय है ऐसे साधु बाबाओं की संख्या तकरीबन ६५ लाख है। जो इस उद्योग पर पूर्णतया निर्भर नहीं है, आंशिक समय गँवाते और उपार्जन करते हैं उन पण्डा पुरोहितों की संख्या भी ४० लाख तो माननी ही पड़ेगी

जनमानस का परिष्कार धर्मतंत्र के मंच से (गायत्री परिवार - Gayatri Pariwar)
इस प्रकार यह राशि १ १० अरब वार्षिक हो जाती है। सोमवती अमावस्या पर गंगा- जमुना इन दो नदियों के स्नान को ही लें, उनके उद्गम से लेकर विलय स्थान तक कम से कम एक करोड़ व्यक्ति तो अवश्य ही उस पर्व पर स्नान करने जाते होंगे। एक व्यक्ति के ऊपर मार्ग व्यय, काम का हर्ज, भोजन, दान- पुण्य आदि का खरच बीस रुपया भी जोड़ा जाए तो एक करोड़ व्यक्तियों पर बीस रुपए के हिसाब से २० करोड़ रुपया होता हैं। ऐसे- ऐसे चार पाँच स्नान वर्ष में पड़ जाते हैं उनका खरच १ अरब तक जा पहुँचता है